अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में दूसरी SIT की एंट्री

अयोध्या श्री राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में दर्ज मुकदमे की विवेचना के लिए गठित दूसरी SIT ट्रस्ट प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े कई बिंदुओं पर और जानकारी जुटाएगी। सूत्रों का कहना है कि कुछ और दस्तावेज भी लिए जाएंगे। एसआईटी में फॉरेंसिक आडिटर समेत दो विशेषज्ञों की भी अहम भूमिका होगी। पुलिस जांच में अब तक चढ़ावा चोरी से जुड़े फैक्ट और साक्ष्यों का नए सिरे से विश्लेषण किया जा रहा है। एसआईटी जल्द अयोध्या जाने की तैयारी में है। आईजी लखनऊ रेंज किरण एस की अगुवाई में गठित एसआईटी में अयोध्या रेंज के डीआईजी सोमेन बर्मा और एसएसपी अयोध्या डॉक्टर गौरव ग्रोवर के अलावा बाराबंकी में तैनात एएसपी रितेश कुमार को भी शामिल किया गया है। मामले में लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में गठित पहली एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर मुकदमा दर्ज कराया गया था और पुलिस ने आठ आरोपितों को गिरफ्तार किया था। साथ ही ट्रस्ट पदाधिकारियों के बयान भी दर्ज किए गए थे। नई एसआईटी भूमिका तय करेगी नई एसआईटी ट्रस्ट पदाधिकारियों के बयान और विवेचना में सामने आए तथ्यों के अनुरूप उनकी भूमिका तय करेगी। स्टेट बैंक के अधिकारियों-कर्मियों के अलावा आउटसोर्सिंग कर्मियों की कुंडली भी नए सिरे से खंगाली जा रही है। खासकर यहा देखा जाएगा कि अपराध में उनकी किसी स्तर पर कोई संलिप्तता तो नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट की मानीटरिंग के चलते एसआईटी सभी पहलुओं को पूरी तरह गहनता से देखने के साथ ही हर बिंदु पर आरोपितों के विरुद्ध ठोस साक्ष्य जुटाएगी।राम मंदिर के समारोहों में भी गड़बड़ी के संकेत उधर, राम मंदिर में चढ़ावा प्रकरण की जांच का दायरा बढ़ने के साथ ही अब मंदिर में आयोजित होने वाले धार्मिक समारोहों और उत्सवों के खर्चों में भी कथित अनियमितताओं की परतें खुलने लगी हैं। सूत्रों के अनुसार, फूलों की खरीद और सजावट के भुगतान में बड़े स्तर पर वित्तीय गड़बड़ी के संकेत मिले हैं।
सूत्रों का दावा है कि एक आयोजन में करीब 7 लाख रुपये के फूलों की सप्लाई के बावजूद 14 लाख रुपये का भुगतान किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि फूलों की सजावट के अलावा अन्य मदों में भी करोड़ों रुपये के भुगतान किए गए, जिनकी जांच की जा रही है। एक अन्य मामले में ध्वजारोहण के दौरान फूलों की सजावट के लिए करोड़ों रुपये का ठेका हुआ। बाद में उन फूलों को उतारने के लिए भी करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया। तीर्थ क्षेत्र के एक न्यासी ने इसमें लंबा खेल किया। यह भी कहा जा रहा है कि एक अन्य उत्सव में जब दूसरी कंपनी ने फूलों की सजावट व उसे उतारने का ठेका बेहद कम कीमत में करने की बात कही तो उसे वह ठेका नहीं दिया गया। बल्कि उसी पुराने ठेकेदार से ही दोबारा वह काम करवाया गया।










Bheem Maurya
