उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार को रायबरेली की याद विकास के नियमित कामकाज के लिए नहीं, बल्कि चुनावी जरूरतों के समय आती है।
शशिकांत शर्मा ने कहा कि रायबरेली की जनता अब केवल शिलान्यास के पत्थर और मंच से होने वाली घोषणाएं नहीं, बल्कि योजनाओं का वास्तविक परिणाम जानना चाहती है।
सवाल यह है कि जिन परियोजनाओं की घोषणाएं पहले की गईं, उनमें कितनी पूरी हुईं, कितनी अधूरी हैं और कितनी आज भी कागजों में चल रही हैं?