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15 अगस्त 2026 · नई दिल्लीई-पेपरलॉगिन
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कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा: आधार, पैन, वोटर आईडी और बैंक खाता नहीं भारतीय नागरिकता का आखिरी प्रमाण

कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा: आधार, पैन, वोटर आईडी और बैंक खाता नहीं भारतीय नागरिकता का आखिरी प्रमाण
कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा: आधार, पैन, वोटर आईडी और बैंक खाता नहीं भारतीय नागरिकता का आखिरी प्रमाण — भारत | City News 24

कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि आधार कार्ड, पैन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और बैंक खाता अपने आप में किसी व्यक्ति की भारतीय नागरिकता का निर्णायक प्रमाण नहीं हैं। अदालत ने यह टिप्पणी एक बंदी प्रत्यक्षीकरण (हैबियस कॉर्पस) याचिका को खारिज करते हुए की, जिसमें विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के बाद हिरासत में लिए गए एक व्यक्ति की रिहाई की मांग की गई थी।न्यायमूर्ति देबांगसु बसाक और न्यायमूर्ति अजय कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि केवल आधार, पैन, बैंक खाता या मतदाता पहचान पत्र के आधार पर भारतीय नागरिकता को निर्णायक रूप से साबित नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि मतदाता पहचान पत्र केवल यह दर्शाता है कि किसी समय व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में दर्ज था, लेकिन यह नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं है। याचिका सुमन मोल्ला ने दायर की थी, जिन्होंने खुद को हिरासत में लिए गए व्यक्ति का चाचा बताते हुए दावा किया कि उसकी अपील लंबित रहने के बावजूद उसे हिरासत में लिया गया। हालांकि, राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि सत्यापन के दौरान संबंधित व्यक्ति की पहचान बांग्लादेशी नागरिक के रूप में हुई है और उसके खिलाफ गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार कार्रवाई की जा रही है। कोर्टऔर न्यायपालिका सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ता द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों में कई विसंगतियों का भी उल्लेख किया। पीठ ने कहा कि जन्म प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं किया गया, अलग-अलग दस्तावेजों में पिता का नाम अलग-अलग दर्ज था और भूमि अभिलेखों के आधार पर नागरिकता का दावा निर्णायक रूप से स्थापित नहीं होता। अदालत ने यह भी नोट किया कि याचिकाकर्ता ने अलग-अलग अवसरों पर अपने और बंदी के रिश्ते को लेकर अलग-अलग दावे किए थे।

Sanjay pandey
Sanjay pandey
Authors · City News 24
उत्तर प्रदेश बहराइच 271801
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