भूमि का अंश निर्धारण कराने के लिए लोगों को तहसील व मुवाफिसखाने का चक्कर काटना पड़ रहा है।
कारण यह कि बंटवारा होने या फिर वरासत के लिए राजस्व कर्मियों को लोग अभिलेख तो देते हैं, लेकिन लापरवाही के कारण किसी को अधिक भूमि दर्ज कर दी जाती है तो किसी की भूमि को दूसरे के नाम दर्ज कर दिया जाता है।
बृहस्पतिवार को की गई पड़ताल में यह खामी उजागर हुई।