लेखपालों की लापरवाही का बड़ा खुलासा, आम जनता हुई परेशान...

श्रावस्ती/तुलसीपुर। भूमि का अंश निर्धारण कराने के लिए लोगों को तहसील व मुवाफिसखाने का चक्कर काटना पड़ रहा है। कारण यह कि बंटवारा होने या फिर वरासत के लिए राजस्व कर्मियों को लोग अभिलेख तो देते हैं, लेकिन लापरवाही के कारण किसी को अधिक भूमि दर्ज कर दी जाती है तो किसी की भूमि को दूसरे के नाम दर्ज कर दिया जाता है। बृहस्पतिवार को की गई पड़ताल में यह खामी उजागर हुई। जमुनहा तहसील क्षेत्र की ग्राम पंचायत तुलसीपुर के मजरा जिनौठा निवासी दिनेश कुमार ने बताया कि उनके पिता कैलाशनाथ सहित तीन भाई राजाराम, हरीराम और कैलाश नाथ गाटा संख्या 1381 रकबा 4.658 हेक्टेयर के सह खातेदार थे। तीनों भाइयों की मृत्यु के बाद उनके उत्तराधिकारियों के बीच नियमानुसार अंश निर्धारित होना था। दिनेश कुमार का आरोप है कि राजाराम के हिस्से की भूमि उनके दो पुत्रों विजय किशोर, भगवानदीन और पत्नी रामदेई के बीच तथा हरिराम के हिस्से की भूमि उनके पुत्रों अखिलेश कुमार, अमरेश कुमार, अलखराम, सुरेश कुमार, रमेश कुमार और पत्नी माया देवी के बीच बंटनी थी। वहीं, कैलाशनाथ के हिस्से की भूमि उनके पुत्रों जयप्रकाश, दिनेश कुमार और राकेश कुमार के नाम दर्ज होनी चाहिए थी। उन्होंने बताया कि लेखपाल ने नियमानुसार हिस्सेदारी तय करने के बजाय सभी उत्तराधिकारियों का हिस्सा लगभग 0.291 हेक्टेयर बराबर-बराबर दर्ज कर दिया। इससे वास्तविक हिस्सेदारी प्रभावित हो गई। पीड़ित का यह भी आरोप है कि केवल गाटा संख्या 1381 ही नहीं, बल्कि गाटा संख्या 1315, 1352, 1354, 1331, 1323, 1319, 1322 और 1371 में भी इसी प्रकार गलत अंश निर्धारण कर दिया गया है। इसके चलते परिवार के सदस्यों को अभिलेख में संशोधन कराने के लिए तहसील और लेखपाल के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। किसानों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर अभिलेखों में नियमानुसार संशोधन कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते त्रुटि नहीं सुधारी गई तो भविष्य में भूमि संबंधी विवाद और बढ़ सकते हैं। यह मामला तुलसीपुर तक ही नहीं सीमित है। यही हाल ग्राम पंचायत चंदरखा बुजुर्ग सहित कई गांवों के किसानों का भी है, जो लेखपाल की कारगुजारियों का परिणाम भुगत रहे हैं। --इनसेट-- भिनगा क्षेत्र के किसान भी परेशान भिनगा क्षेत्र के ग्राम शिवगढ़ कलां निवासी कृष्णचंद ने बताया कि मां के निधन के बाद लेखपाल को अंश निर्धारण के लिए लेखपाल को दस्तावेज दिया था। इसमें प्रेमचंद्र, कृष्णचंद, पुष्पेंद्र व उनके दिवंगत भाई की पत्नी पूनम, पुत्र रोहित व मोहित की नियमानुसार हिस्सेदारी तय करनी थी। पहले खरीदी गई भूमि के विक्रेता तीन भाइयों ने अपनी-अपनी भूमि बेच दी है फिर भी तीनों भाइयों को बराबर का हिस्सेदार बना दिया है। ऐसे में पीड़ित को अंश दुरुस्त कराने के लिए लेखपाल के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। लेखपाल कभी मुआफिसखाने से पूर्व की नकल निकलवाने के लिए कहते हैं तो कभी सभी विक्रेताओं को इकट्ठा करने की बात करते हैं। ऐसे में सभी को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।











