कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि आधार कार्ड, पैन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और बैंक खाता अपने आप में किसी व्यक्ति की भारतीय नागरिकता का निर्णायक प्रमाण नहीं हैं।
अदालत ने स्पष्ट किया कि मतदाता पहचान पत्र केवल यह दर्शाता है कि किसी समय व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में दर्ज था, लेकिन यह नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं है।
याचिका सुमन मोल्ला ने दायर की थी, जिन्होंने खुद को हिरासत में लिए गए व्यक्ति का चाचा बताते हुए दावा किया कि उसकी अपील लंबित रहने के बावजूद उसे हिरासत में लिया गया।