अवैध शराब की बिक्री पर फूटा महिलाओं का गुस्सा, 12 गांवों की महिलाओं ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर जताया विरोध

खंडवा। गांवों में अवैध शराब की बिक्री से परेशान करीब 10 से 12 गांवों की महिलाएं मंगलवार को जिला मुख्यालय पहुंचीं। महिलाओं ने रैली निकालकर कलेक्टर कार्यालय तक पहुंच बनाई और जमकर नारेबाजी करते हुए अवैध शराब की बिक्री पर रोक लगाने की मांग की। महिलाओं का आरोप है कि गांवों में किराना दुकानों और टपरियों तक पर कच्ची और पक्की शराब खुलेआम बेची जा रही है, जिससे कई परिवारों का माहौल खराब हो रहा है।
महिलाओं का कहना है कि शराब की वजह से घरों में आए दिन विवाद होते हैं। कई मामलों में पति और बच्चे घर का पैसा व सामान तक चोरी कर शराब में खर्च कर देते हैं। महिलाओं ने आरोप लगाया कि लाड़ली बहना योजना से मिलने वाली राशि भी कई बार पति विवाद कर उनसे ले लेते हैं और उस पैसे का इस्तेमाल शराब खरीदने में किया जाता है।
गड्ढों में छिपाकर रखी जाती है शराब
ज्ञापन देने पहुंचीं ममता मोरे ने बताया कि अवैध शराब से परेशान महिलाएं लगातार प्रशासन को इसकी जानकारी दे रही हैं। उनका आरोप है कि शराब बेचने वाले कार्रवाई से बचने के लिए घरों के आसपास जमीन में गड्ढे बनाकर शराब छिपा देते हैं। महिलाओं को इन स्थानों की जानकारी रहती है, लेकिन कार्रवाई के दौरान शराब बरामद नहीं हो पाती।
महिलाओं ने आबकारी विभाग के अमले पर भी गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि जब वे अधिकारियों को शराब छिपाए जाने की जगह की जानकारी देती हैं, तब भी कई बार वहां कार्रवाई नहीं की जाती। महिलाओं ने आरोप लगाया कि विरोध करने पर कुछ अधिकारी उनके साथ बदतमीजी और डराने-धमकाने जैसा व्यवहार करते हैं।
‘कागजी कार्रवाई नहीं, जमीन पर कार्रवाई चाहिए’
ममता मोरे ने कहा कि चुनाव के समय महिलाएं और ग्रामीण अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर जनप्रतिनिधियों को चुनते हैं। ऐसे में उनकी समस्याओं पर भी गंभीरता से कार्रवाई होनी चाहिए। महिलाओं ने प्रशासन से मांग की कि केवल कागजी कार्रवाई करने के बजाय गांवों में पहुंचकर अवैध शराब के ठिकानों पर ठोस कार्रवाई की जाए।
संयुक्त दल बनाकर कार्रवाई का आश्वासन
महिलाओं की शिकायत पर जिला प्रशासन की ओर से पुलिस और आबकारी विभाग का संयुक्त दल बनाकर अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई करने का आश्वासन दिया गया है। प्रशासन ने महिलाओं की शिकायतों की जांच कर समस्या के समाधान का प्रयास करने की बात कही है। अब देखना होगा कि ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध शराब के खिलाफ प्रशासन की कार्रवाई कितनी प्रभावी साबित होती है।

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