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29 अगस्त 2026 · नई दिल्लीई-पेपरलॉगिन
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नेता जी के संघर्ष पर तंज कसने वालों को पहले अपना राजनीतिक कद देखना चाहिए - डा. शशिकांत शर्मा

नेता जी के संघर्ष पर तंज कसने वालों को पहले अपना राजनीतिक कद देखना चाहिए - डा. शशिकांत शर्मा
नेता जी के संघर्ष पर तंज कसने वालों को पहले अपना राजनीतिक कद देखना चाहिए - डा. शशिकांत शर्मा — राजनीति | City News 24

नेताजी के संघर्ष पर तंज कसने वालों को पहले अपना राजनीतिक कद देखना चाहिए: डॉ. शशिकांत शर्मा

रायबरेली। समाजवादी पार्टी के प्रदेश सचिव डॉ. शशिकांत शर्मा ने भाजपा विधायक नंदकिशोर गुर्जर द्वारा समाजवादी पार्टी के संस्थापक एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव को लेकर दिए गए कथित आपत्तिजनक बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि मुलायम सिंह यादव के संघर्ष और राजनीतिक कद पर टिप्पणी करने से पहले हर व्यक्ति को अपने राजनीतिक जीवन और जनता के बीच किए गए कार्यों का आकलन करना चाहिए। डॉ. शर्मा ने कहा कि मुलायम सिंह यादव का नाम लेना आसान है, लेकिन उनके जैसा संघर्ष करना हर किसी के बस की बात नहीं है। नेताजी ने जमीन से उठकर राजनीति की शुरुआत की और गांव, गरीब, किसान, मजदूर, पिछड़े, नौजवान तथा आम जनता के बीच रहकर अपना राजनीतिक आधार तैयार किया। अपने लंबे संघर्ष और जनसमर्थन के बल पर उन्होंने उत्तर प्रदेश की राजनीति में ऐसी पहचान बनाई, जिसे किसी व्यक्ति की बयानबाजी से छोटा नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि मुलायम सिंह यादव ने सामाजिक न्याय और वंचित वर्गों की आवाज को राजनीतिक मंच पर मजबूती से उठाया। उनके संघर्ष का मजाक उड़ाना सिर्फ एक नेता का अपमान नहीं, बल्कि उन तमाम मेहनतकश लोगों का भी अपमान है, जिन्होंने अपनी मेहनत और संघर्ष के दम पर जीवन में मुकाम हासिल किया है। नंदकिशोर गुर्जर के बयान पर कटाक्ष करते हुए डॉ. शर्मा ने कहा कि नेताजी मुख्यमंत्री नहीं बनते तो क्या करते, इसका जवाब देने की जरूरत किसी और को नहीं है। उन्होंने अपने जीवन में संघर्ष किया और जनता ने उन्हें बार-बार अपना नेता चुना। उन्होंने कहा कि कोई भी मेहनत का काम छोटा नहीं होता, लेकिन किसी मेहनतकश के पेशे को राजनीतिक ताने के रूप में इस्तेमाल करना निश्चित रूप से सोच के स्तर को दर्शाता है। डॉ. शर्मा ने कहा कि मुलायम सिंह यादव ने साइकिल को महज चुनाव चिन्ह नहीं रहने दिया, बल्कि उसे गांव, गरीब, किसान, मजदूर और आम आदमी की आवाज का प्रतीक बना दिया। उन्होंने अपने संघर्ष के बल पर उत्तर प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान बनाया और तीन बार प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। इसके अलावा केंद्र की राजनीति में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सपा प्रदेश सचिव ने कहा कि लोकतंत्र में वैचारिक मतभेद होना स्वाभाविक है और राजनीतिक दलों के बीच नीतियों को लेकर बहस भी होनी चाहिए, लेकिन व्यक्तिगत टिप्पणियों के जरिए किसी वरिष्ठ नेता के संघर्ष और योगदान को अपमानित करना स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपरा नहीं है। उन्होंने भाजपा नेताओं को सलाह देते हुए कहा कि बयानबाजी और व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप के बजाय जनता से जुड़े मुद्दों पर अपनी उपलब्धियां और नीतियां सामने रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि दूसरों के संघर्ष पर तंज कसने से किसी का राजनीतिक कद बड़ा नहीं होता। मुलायम सिंह यादव ने अपना कद सुर्खियों या बयानों से नहीं, बल्कि दशकों तक जनता के बीच रहकर संघर्ष करने से बनाया था। डॉ. शर्मा ने कहा कि मुलायम सिंह यादव का राजनीतिक योगदान किसी व्यक्ति के बयान का मोहताज नहीं है। सामाजिक न्याय की राजनीति, आम जनता के बीच उनकी स्वीकार्यता और दशकों का उनका संघर्ष इतिहास का हिस्सा है। उन्होंने कहा, “नेताजी इतिहास में दर्ज हैं और इतिहास बयानबाजी से नहीं मिटता। बेहतर होगा कि नंदकिशोर गुर्जर जी नेताजी के संघर्ष पर टिप्पणी करने के बजाय अपने राजनीतिक काम का हिसाब जनता के सामने रखें। बड़े नेताओं पर तंज कसने से कोई बड़ा नहीं होता, कई बार ऐसे बयानों से बयान देने वाले का राजनीतिक कद ही छोटा दिखाई देने लगता है।”

Abhay Kumar Dwivedi
Abhay Kumar Dwivedi
Reporter · City News 24
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