संत गणेश प्रसाद वर्णी की 152वीं जयंती पर हुआ भव्य आयोजन, संस्कृत शिक्षा के संरक्षण का लिया संकल्प

बरुआसागर। श्री पारसनाथ दिगंबर जैन संस्कृत विद्यालय, कोठीपुरा बरुआसागर के संस्थापक संत श्री गणेश प्रसाद वर्णी जी की 152वीं जन्म जयंती महोत्सव एवं विद्यालय के 93वें स्थापना वर्ष के अवसर पर भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बबीना विधायक श्री राजीव सिंह परीक्षा मुख्य अतिथि, शिक्षक विधायक विधान परिषद श्री बाबूलाल तिवारी एवं बीड़ा के चीफ जनरल मैनेजर श्री अरविंद कुमार जैन विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ विशिष्ट अतिथि श्री अरविंद कुमार जैन की माताजी के कर कमलों से ध्वजारोहण के साथ हुआ। इसके बाद अतिथियों द्वारा आचार्य श्री विद्यासागर महाराज एवं संत श्री गणेश प्रसाद वर्णी के चित्र का अनावरण तथा दीप प्रज्वलन किया गया। श्रीमती शिखा जैन ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर संस्था के अध्यक्ष डॉ. नरेंद्र जैन, उपाध्यक्ष विमलेश चौधरी, कोषाध्यक्ष सुकुमाल मुखिया एवं ऋषभ सिंघई, प्रबंधक चौधरी संजय जैन, निर्मल अलया, गुलाब चंद्र जैन, अध्यापक राजेंद्र जैन, सौरभ चौधरी, जिनेंद्र कुमार जैन, कोठीपुरा के संदीप जैन, बेबी प्रदीप जैन, राजापुर के बृजेश जैन, पत्रकार पवन कुमार जैन, अशोक जैन मामा, रमेश चंद्र जैन कपड़ा, जैन समाज महामंत्री विनोद कुमार जैन एवं एडवोकेट सुनील जैन मामा सहित अन्य पदाधिकारियों ने अतिथियों का माल्यार्पण एवं संस्था की पट्टिका पहनाकर स्वागत किया।
कार्यक्रम के दौरान विद्यावर्धिनी प्रतियोगिता का आयोजन हुआ, जिसमें प्रथम स्थान श्रीमती शिखा नायक जैन, द्वितीय पूजा अलया जैन, तृतीय स्नेह लता जैन, चतुर्थ ज्योति जैन तथा पंचम स्थान श्रीमती भारती एवं राशि भंडारी ने प्राप्त किया। भगवान के गुणानुवाद प्रतियोगिता में प्रथम स्नेह लता जैन, द्वितीय संगीता चौधरी जैन एवं तृतीय शिखा नायक जैन रहीं। बच्चों की प्रतियोगिता में प्रथम स्थान कुमारी अनिका जैन ने प्राप्त किया। सभी विजेताओं को अतिथियों द्वारा पुरस्कार प्रदान किए गए।
मुख्य अतिथि विधायक राजीव सिंह परीक्षा ने संत गणेश प्रसाद वर्णी के शिक्षा एवं समाज सेवा के योगदान को याद करते हुए कहा कि वर्णी जी ने देशभर में पदयात्रा कर अनेक पाठशालाओं, विद्यालयों एवं महाविद्यालयों की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर के ‘जियो और जीने दो’ तथा ‘अहिंसा परमो धर्मः’ के संदेश से ही विश्व में शांति का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। उन्होंने प्राचीन शिक्षण संस्थाओं के संरक्षण एवं संचालन को आवश्यक बताया।
शिक्षक विधायक बाबूलाल तिवारी ने संत गणेश प्रसाद वर्णी के संस्कृत भाषा एवं शिक्षा के क्षेत्र में योगदान को स्मरण करते हुए संस्था के गौरवशाली इतिहास की सराहना की। उन्होंने विद्यालय को महाविद्यालय के रूप में विकसित करने तथा संस्कृत-प्राकृत भाषा के संरक्षण और शोध संस्थान की दिशा में सहयोग की बात कही।
विशिष्ट अतिथि अरविंद कुमार जैन ने वर्णी जी के जीवन से जुड़े प्रसंग साझा करते हुए बताया कि उन्होंने समाज के श्रेष्ठियों एवं दानवीरों को पत्रों के माध्यम से जागरूक कर अनेक शैक्षणिक संस्थाओं की स्थापना में योगदान दिया। उन्होंने वर्णी जी के जीवन एवं कार्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर जोर दिया।
संस्था कोषाध्यक्ष ऋषभ सिंघई ने संत गणेश प्रसाद वर्णी के जीवन से जुड़े विभिन्न दृष्टांत प्रस्तुत किए। वहीं मुनि पुंगव निर्यापक श्रमण सुधा सागर महाराज के 44वें दीक्षा वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में अतिथियों द्वारा वृक्षारोपण भी किया गया।
कार्यक्रम का आयोजन दिगंबर जैन संत सुधासागर जीवोदय संस्थान द्वारा किया गया। संचालन चौधरी संजय जैन महामंत्री ने किया तथा संस्था के अध्यक्ष डॉ. नरेंद्र जैन ने सभी अतिथियों एवं उपस्थितजनों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के अंत में वात्सल्य भोज के बाद समापन की घोषणा की गई। इस दौरान बड़ी संख्या में जैन समाज के महिला-पुरुष एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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