भोपाल ।"मुस्कान सोशल वेलफेयर सोसाइटी"ने 250 बच्चों के चेहरों पर बिखेरी दीपावली की मुस्कान

दीपावली का पर्व खुशियों, प्रेम, सद्भाव और आपसी सहयोग का प्रतीक है। इसी भावना को सार्थक करते हुए शिक्षा, सेवा और खुशियों के संग जरूरतमंद बच्चों के साथ मनाया रोशनी का पर्व, अध्ययन सामग्री से लेकर मिठाई और पटाखों तक का किया वितर। मुस्कान सोशल वेलफेयर सोसाइटी द्वारा राजधानी भोपाल की विभिन्न बस्तियों में संचालित निःशुल्क शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत बच्चों के साथ दीपावली का त्योहार हर्षोल्लास एवं उत्साह के साथ मनाया गया। इस विशेष आयोजन का मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर एवं जरूरतमंद परिवारों के बच्चों को भी दीपावली की खुशियों में शामिल करना तथा उनके जीवन में शिक्षा, संस्कार और सामाजिक सहयोग की भावना को प्रोत्साहित करना रहा। संस्था के सदस्यों ने बच्चों के बीच पहुंचकर उनके साथ त्योहार की खुशियां साझा कीं और उन्हें अपनत्व एवं सहयोग का संदेश दिया। कार्यक्रम के दौरान लगभग 250 बच्चों को अध्ययन सामग्री, पटाखे, नमकीन, मिठाइयां, भोजन एवं अन्य आवश्यक सामग्री वितरित की गई। उपहार और सामग्री पाकर बच्चों के चेहरों पर खुशी और उत्साह देखते ही बन रहा था। बच्चों ने भी इस अवसर पर उत्साहपूर्वक भाग लिया और सभी के साथ दीपावली की खुशियां साझा कीं। संस्था के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने कहा कि दीपावली केवल दीप जलाने और मिठाइयां बांटने का पर्व नहीं है, बल्कि यह समाज के प्रत्येक वर्ग तक खुशियां पहुंचाने और जरूरतमंदों के जीवन में आशा का दीप प्रज्वलित करने का अवसर भी है। समाज के सक्षम लोगों को आगे आकर ऐसे बच्चों की शिक्षा एवं बेहतर भविष्य के लिए सहयोग करना चाहिए। संस्था भविष्य में भी इसी प्रकार सामाजिक सरोकारों से जुड़े सेवा कार्य निरंतर करती रहेगी।इस अवसर पर गौरव जैन, आकाश श्रवण, धीरज सोनी, विजय अय्यर, प्रसंग जैन, आर्यन श्रीवास्तव, अनुषा तिवारी, हर्षिता रावत, राहुल ठाकुर, राणा साहित्य लोधी, सुमित पटेल सहित शहर के अनेक समाजसेवी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान समाजहित में निरंतर सेवा कार्य करने वाले वरिष्ठ समाजसेवियों के योगदान को भी सम्मानित किया गया। उनके सामाजिक समर्पण, सेवाभाव एवं जनकल्याण के कार्यों की सराहना करते हुए उन्हें सम्मान प्रदान किया गया। मुस्कान सोशल वेलफेयर सोसाइटी का यह आयोजन इस संदेश के साथ संपन्न हुआ कि समाज की वास्तविक खुशियां तभी सार्थक होती हैं, जब उनकी रोशनी जरूरतमंदों के जीवन तक भी पहुंचे।

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