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7 अक्टूबर 2026 · नई दिल्लीई-पेपरलॉगिन
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BRICS में भारत का बढ़ा दबदबा! रूस-चीन समेत सभी देशों ने घोषणापत्र पर जताई सहमति !

भारत ने रूस-चीन जैसी ताकतों के बीच BRICS देशों से घोषणापत्र पर दस्तखत करा लिए" कहना इस अर्थ में सही है कि भारत की अध्यक्षता में कई महत्वपूर्ण संयुक्त घोषणाएँ सर्वसम्मति से पारित हुईं।

BRICS में भारत का बढ़ा दबदबा! रूस-चीन समेत सभी देशों ने घोषणापत्र पर जताई सहमति !
भारत ने रूस-चीन जैसी ताकतों के बीच BRICS देशों से घोषणापत्र पर दस्तखत करा लिए" कहना इस अर्थ में सही है कि भारत की अध्यक्षता में कई महत्वपूर्ण संयुक्त घोषणाएँ सर्वसम्मति से पारित हुईं। — भारत | City News 24

भारत ने एक बार फिर वैश्विक मंच पर अपनी मजबूत कूटनीतिक क्षमता का परिचय दिया है। BRICS की अध्यक्षता के दौरान भारत ने रूस, चीन समेत सभी सदस्य देशों को कई महत्वपूर्ण संयुक्त घोषणापत्रों पर सहमति दिलाने में सफलता हासिल की। इसे भारत की वैश्विक नेतृत्व क्षमता और "सर्वसम्मति बनाने वाले देश" के रूप में उभरती भूमिका का बड़ा संकेत माना जा रहा है।

BRICS अब केवल पांच देशों का समूह नहीं रहा, बल्कि इसके विस्तार के बाद इसमें कई नए सदस्य देश भी शामिल हो चुके हैं। ऐसे में अलग-अलग देशों के हितों और प्राथमिकताओं के बीच किसी साझा दस्तावेज़ पर सहमति बनाना आसान नहीं माना जाता। इसके बावजूद भारत ने अपनी अध्यक्षता के दौरान विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े महत्वपूर्ण घोषणापत्रों को सर्वसम्मति से पारित कराया।

सबसे प्रमुख "इंदौर घोषणा" रही, जिसे BRICS कृषि मंत्रियों ने अपनाया। इस घोषणा में खाद्य सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए टिकाऊ खेती, आधुनिक कृषि तकनीक, डिजिटल कृषि और किसानों की आय बढ़ाने जैसे विषयों पर जोर दिया गया। भारत ने इस मंच पर किसान-केंद्रित विकास और कृषि नवाचार को प्रमुख एजेंडा बनाया।

इसके अलावा "गुवाहाटी घोषणा" के माध्यम से BRICS देशों ने अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी और संगठित अपराध के खिलाफ मिलकर कार्रवाई करने का संकल्प लिया। सदस्य देशों ने खुफिया जानकारी साझा करने, आपसी सहयोग बढ़ाने और सीमा पार अपराधों पर संयुक्त रणनीति बनाने पर सहमति व्यक्त की।

न्याय मंत्रियों की बैठक में भी एक महत्वपूर्ण संयुक्त घोषणा को मंजूरी दी गई, जिसमें मध्यस्थता (Mediation), पंचाट (Arbitration) और कानूनी सहयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच विवादों के समाधान को अधिक प्रभावी और सरल बनाना है।

विशेष बात यह रही कि इन सभी घोषणाओं पर रूस, चीन सहित सभी BRICS सदस्य देशों ने सहमति जताई। चूंकि BRICS में फैसले आम सहमति के आधार पर लिए जाते हैं, इसलिए भारत की यह सफलता उसकी मजबूत कूटनीतिक रणनीति और संतुलित नेतृत्व का उदाहरण मानी जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि BRICS की अध्यक्षता के दौरान भारत ने न केवल विकासशील देशों की आवाज़ को मजबूती से उठाया, बल्कि वैश्विक दक्षिण (Global South) के मुद्दों को भी अंतरराष्ट्रीय एजेंडे में प्रमुख स्थान दिलाने का प्रयास किया। इससे विश्व राजनीति में भारत की भूमिका और अधिक प्रभावशाली होती दिखाई दे रही है।

हालांकि, यह भी ध्यान देने योग्य है कि BRICS की संयुक्त घोषणाएँ सभी सदस्य देशों की सामूहिक सहमति का परिणाम होती हैं। इसलिए इसे किसी देश की हार या जीत के रूप में नहीं, बल्कि भारत की महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि के रूप में देखा जाना अधिक उचित होगा।

Sanjay pandey
Sanjay pandey
Authors · City News 24
उत्तर प्रदेश बहराइच 271801
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